मूवी रिव्यू: सन ऑफ सरदार 2 – अजय देवगन की कॉमेडी का वापसी अंदाज़

 मूवी रिव्यू: सन ऑफ सरदार 2 – अजय देवगन की कॉमेडी का वापसी अंदाज़


बॉलीवुड में इस टाइम सीक्वल का ट्रेंड चल रहा है जैसे कोई नया प्रोजेक्ट है ही नहीं ,और इस ट्रेंड के किंग है सुपरस्टार अजय देवगन। हाल ही में उनकी दृश्यम 2 ,हिट रही उसके बाद रेड 2 भी आयी। 1 अगस्त (शुक्रवार ) को उनकी एक और हिट फिल्म का सीक्वल आ चुकी है , सन ऑफ सरदार 2 ।यह फिल्म 2012 में आयी  सन ऑफ सरदार फिल्म का सीक्वल है।वैसे दोनो फिल्मो की कहानी में बहुत अंतर है। 

Ajay Devgn in Son of Sardaar 2 Movie Still



" सन ऑफ सरदार 2 " की कहानी 

कहानी ऐसी है की अजय देवगन जो एक शादी सुदा आदमी है जिसकी बीबी विदेश में रहती है , और ओ अपने बेबो के साथ गांव में, उसे कई सालो से बीजा नहीं मिलता , अचानक से एक दिन उसकी बीबी का फोन आता है की उसे बीजा मिल गया और ओ विदेश अपने बीबी के पास चला जाता है। वहा जाने के बाद उसे पता चलता है की उसकी बीबी उसे तलाक देने के लिए उसे बुलाई है। तलाक देने के लिए ओ राजी हो जाता है और इसी सिलसिले में ो एक दिन राबिया (मृणाल ठाकुर ) से मिलता है जो एक पाकिस्तानी है जिसकी शादी भी हो चुकी है जिसका पति चंकी पांडेय है , राबिया का पति एक दिन उसे छोड़ के भाग जाता है अपनी एक बेटी हो छोड़ कर , अब राबिया अपनी सौतेली बेटी की शादी के लिए अजय देवगन को बाप बन ने का नाटक करने को कहती है जो एक भारतीय शारदार परिवार का लड़का होता है। बस उसी की शादी को लेकर जो बखेड़ा होता है पूरी फिल्म में। अगर आप को बिना सर पैर और बिना लॉजिक की फिल्मे पसंद है तो जरूर देखे। 


मूवी रिव्यू: सन ऑफ सरदार 2


'सन ऑफ सरदार 2' एक टिपिकल बॉलीवुड सीक्वल है जिसमें हंसी, ड्रामा, इमोशन और थोड़ा बहुत एक्शन सबकुछ डालने की कोशिश की गई है — लेकिन यह मिक्सचर हर किसी को पसंद आए, ज़रूरी नहीं।


फिल्म का प्लॉट दिलचस्प है: एक ऐसा पति जो अपनी बीवी को दोबारा पाने के लिए लंदन जाता है, लेकिन वहां उसे दूसरा झटका लगता है। फिर कहानी करवट लेती है जब जस्सी एक पाकिस्तानी लड़की राबिया से मिलता है। इस मोड़ पर फिल्म एक अलग ही ट्रैक पर चल पड़ती है – जहां एक नकली पिता बनकर जस्सी एक कपल की शादी करवाना चाहता है।

निर्देशन की बात करें तो विजय कुमार अरोड़ा ने कोशिश की है कि फिल्म को एंटरटेनिंग बनाए रखें, लेकिन स्क्रिप्ट में इतने सबप्लॉट्स और किरदार हैं कि कहानी बिखरती हुई सी लगती है।

कॉमेडी की बात करें तो फिल्म में कुछ जगहें ऐसी हैं जहां आप हंसते हैं, खासकर रवि किशन और दीपक डोबरियाल जैसे कलाकारों के कारण। लेकिन वहीं कुछ जोक्स जबरन ठूंसे हुए लगते हैं, जैसे– कब्रिस्तान से पोस्ते चुराने वाला ट्रैक या बार-बार बोली जाने वाली मांओं से जुड़ी फूहड़ बातें।




एक्टिंग परफॉर्मेंस


अजय देवगन जस्सी के रोल में पुराने फॉर्म में दिखते हैं, लेकिन कुछ नया नहीं है। मृणाल ठाकुर का किरदार मजबूत और दिल छूने वाला है।रवि किशन का बिहारी सरदार रोल बेहद मजेदार और फ्रेश लगता है।दीपक डोबरियाल ने ट्रांसवुमन के किरदार में जान डाल दी है।


म्यूजिक और तकनीकी पक्ष

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी अच्छी है, खासकर लंदन की लोकेशंस खूबसूरती से दिखाई गई हैं।लेकिन गाने फिल्म की गति को रोकते हैं और अधिक प्रभाव नहीं छोड़ते।एडिटिंग और बैकग्राउंड म्यूजिक औसत है।


फिल्म क्यों देखें?

अगर आप बिना दिमाग लगाए हल्की-फुल्की कॉमेडी एन्जॉय करना चाहते हैं और अजय देवगन के फैन हैं, तो 'सन ऑफ सरदार 2' एक बार देखने लायक है।


दर्शकों की राय क्या है?

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ दर्शकों ने फिल्म को मजेदार कहा, तो कुछ ने इसे 2012 की 'सन ऑफ सरदार' से कमजोर माना। ट्विटर पर कई यूज़र्स ने अजय देवगन की कॉमिक टाइमिंग की तारीफ की है, वहीं कुछ ने स्क्रिप्ट को बोरिंग कहा।


हिट या फ्लॉप?

अब तक के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के हिसाब से फिल्म औसत प्रदर्शन कर रही है। पहले दिन की ओपनिंग धीमी रही, लेकिन वीकेंड में हल्का उछाल देखा गया। अगर वर्ड ऑफ माउथ अच्छा गया तो फिल्म रिकवर कर सकती है।


 पार्ट 1 vs पार्ट 2 में फर्क:

पॉइंटपार्ट 1 (2012)पार्ट 2 (2025)
कॉमेडीज्यादा फ्रेश थीकुछ रिपीटेड जोक्स
स्टारकास्टमल्टीस्टाररसपोर्टिंग कास्ट दमदार
स्क्रीनप्लेसिंपल और फनथोड़ा कन्फ्यूजन वाला
हिट या फ्लॉपहिटअभी तय नहीं

निष्कर्ष:

अगर आप लॉजिक से ज़्यादा एंटरटेनमेंट को तवज्जो देते हैं, तो ‘सन ऑफ सरदार 2’ एक बार देखी जा सकती है। अजय देवगन के फैंस को उनकी कॉमिक टाइमिंग पसंद आ सकती है, लेकिन फिल्म में कई जगह कमजोर कड़ियां हैं जो निराश कर सकती हैं।

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