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| दो बच्चे मोबाइल पर देर रात तक स्क्रॉल करता हुआ |
ज्यादा गैजेट इस्तेमाल करने वाले किशोरों में 5 दीर्घकालीन स्वास्थ्य जोखिम – AIIMS स्टडी की रिपोर्ट
आज के समय में स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट किशोरों के सबसे बड़े साथी बन चुके हैं। चाहे पढ़ाई हो, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग या एंटरटेनमेंट – हर जगह गैजेट्स का इस्तेमाल बढ़ गया है। लेकिन AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) की हाल ही में आई स्टडी ने यह चेतावनी दी है कि ज्यादा समय तक गैजेट्स पर निर्भर रहने वाले किशोर कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर सकते हैं।
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| डॉक्टर आंखों की जांच करता हुआ बच्चा – स्क्रीन टाइम से जुड़ी समस्या को दर्शाते हुए। |
1. आंखों की रोशनी पर खतरा
लंबे समय तक स्क्रीन पर आंखें गड़ाए रहने से डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या बढ़ रही है।
* इसमें आंखों में जलन, पानी आना और सिरदर्द शामिल हैं।
* लगातार ब्लू लाइट के संपर्क में रहने से रेटिना को नुकसान पहुँच सकता है।
* रिसर्च कहती है कि 10 में से 6 बच्चे रोजाना स्क्रीन देखने के कारण आंखों की थकान महसूस करते हैं।
2. मानसिक स्वास्थ्य की समस्या
AIIMS की स्टडी के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों को सामाजिक रूप से अलग-थलग कर रहा है।
* ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया एडिक्शन बच्चों में चिड़चिड़ापन और अकेलापन बढ़ा रहा है।
* लगातार नोटिफिकेशन और वर्चुअल प्रेशर से एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक दिक्कतें भी सामने आ रही हैं।
* डॉक्टरों का कहना है कि गैजेट्स का गलत इस्तेमाल मस्तिष्क के विकास पर भी असर डाल सकता है।
3. नींद का पैटर्न बिगड़ना
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| नींद से जूझता बच्चा बिस्तर पर मोबाइल पकड़े हुए। |
गैजेट्स से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद के लिए जिम्मेदार हार्मोन मेलाटोनिन को दबा देती है।
* इसके कारण बच्चों को नींद आने में देर लगती है।
* देर रात तक मोबाइल देखने वाले बच्चे दिन में थकान, आलस और पढ़ाई में ध्यान की कमी महसूस करते हैं।
* अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो यह क्रॉनिक इंसोम्निया का रूप ले सकती है।
4. मोटापा और शारीरिक कमजोरी
लंबे समय तक गैजेट्स पर बैठे रहने से बच्चे शारीरिक गतिविधियों से दूर हो जाते हैं।
* इससे शरीर में कैलोरी बर्न नहीं होती, और धीरे-धीरे मोटापा बढ़ने लगता है।
* रिसर्च के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
* बिना एक्टिविटी के मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और हड्डियों पर भी बुरा असर पड़ता है।
5. सामाजिक संबंधों पर असर
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| पार्क में मोबाइल देखता बच्चा और पास में खेलते बच्चे – फर्क दर्शाने वाली तस्वीर। |
AIIMS की रिपोर्ट कहती है कि तकनीक ने बच्चों को वर्चुअल दुनिया से जोड़ा है, लेकिन असल जिंदगी से तोड़ा है।
* बच्चे परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के बजाय स्क्रीन पर ज्यादा वक्त देते हैं।
* इससे रिश्तों में दूरी आती है और बच्चों का कम्युनिकेशन स्किल भी कमजोर हो जाता है।
* धीरे-धीरे वे समाज से कटकर सिर्फ वर्चुअल रिलेशनशिप्स में जीने लगते हैं।
समाधान क्या है?
👉 माता-पिता और बच्चों को मिलकर इस समस्या का हल निकालना होगा।
* बच्चों का स्क्रीन टाइम रोजाना 2 घंटे से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
* हर 30 मिनट बाद 5 मिनट का आई एक्सरसाइज और ब्रेक जरूरी है।
* सोने से कम से कम 1 घंटा पहले गैजेट्स को बंद कर देना चाहिए।
* बच्चों को खेलकूद, योग और आउटडोर गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।
* माता-पिता को खुद भी डिजिटल डिटॉक्स का उदाहरण देना चाहिए।
FAQs
Q1. क्या हर गैजेट का इस्तेमाल हानिकारक है?
👉 नहीं, असली समस्या अत्यधिक और बिना नियंत्रण के इस्तेमाल से होती है।
Q2. बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित स्क्रीन टाइम कितना है?
👉 WHO के अनुसार, 5 से 17 साल के बच्चों को रोजाना अधिकतम 2 घंटे स्क्रीन टाइम देना चाहिए।
Q3. क्या ब्लू लाइट फिल्टर वाले चश्मे कारगर हैं?
👉 हाँ, ये आंखों पर दबाव कम करते हैं, लेकिन स्क्रीन टाइम घटाना ही सबसे बड़ा समाधान है।
Q4. क्या ऑनलाइन पढ़ाई भी नुकसान करती है?
👉 नहीं, पढ़ाई जरूरी है लेकिन इसके बीच-बीच में ब्रेक और आंखों को आराम देना अनिवार्य है।




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